अनुसंधान प्रभारी
नाम
श्री एस. के. अल्ताफ हुसैन
पदनाम
सहायक निदेशक
ई-मेल आईडी
skaltaf[dot]hossain[at]gov[dot]in
संपर्क संख्या
033-29520097
अनुसंधान प्रकोष्ठ के बारे में
संस्थान का अनुसंधान प्रकोष्ठ व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रशिक्षण रूपरेखाएँ एवं पाठ्यक्रम उद्योग की बदलती आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय कौशल प्राथमिकताओं के अनुरूप बने रहें।
यह प्रकोष्ठ कौशल अंतराल विश्लेषण (Skill Gap Analysis), पाठ्यक्रम निर्माण एवं संशोधन तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) के अनुरूपता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन करता है। इन प्रयासों का उद्देश्य रोजगार क्षमता में वृद्धि, कार्यबल की गुणवत्ता में सुधार तथा सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना है।
अनुसंधान प्रकोष्ठ द्वारा विकसित एवं संशोधित पाठ्यक्रम निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत क्रियान्वित किए जाते हैं:
शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS)
वर्ष 1950 में प्रारंभ की गई शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS) व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। इसने देशभर में स्थापित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) के विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से कुशल कार्यबल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वर्ष 1956 में इसका प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकारों को हस्तांतरित किया गया तथा वर्ष 1969 में वित्तीय नियंत्रण का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ।
शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना (CITS)
शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना (CITS) का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षकों की क्षमता निर्माण करना है तथा यह प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) की प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक है।
यह योजना तकनीकी दक्षताओं एवं शिक्षण पद्धतियों दोनों में संरचित प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे प्रभावी ज्ञान हस्तांतरण तथा उद्योगोन्मुख कुशल मानव संसाधन का विकास सुनिश्चित होता है।
शिक्षुता प्रशिक्षण
उद्योगों में उपलब्ध अवसंरचना का उपयोग कर संरचित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा शिक्षा एवं रोजगार के मध्य की दूरी को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 1961 में शिक्षु अधिनियम लागू किया गया।
इस अधिनियम का विस्तार वर्ष 1973, 1986 एवं 2014 में संशोधनों के माध्यम से किया गया, जिसके अंतर्गत स्नातक, तकनीशियन, तकनीशियन (व्यावसायिक) तथा वैकल्पिक व्यवसाय शिक्षुओं को सम्मिलित किया गया।
शिक्षु अधिनियम, 1961 के उद्देश्य
- केंद्रीय शिक्षुता परिषद द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम, अवधि एवं मानकों के अनुरूप शिक्षुता प्रशिक्षण का विनियमन करना।
- उद्योगों में उपलब्ध अवसंरचना का अधिकतम उपयोग करते हुए व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की मांग को पूरा करना।